मंगलवार, 29 मई 2012



Marital Love

 समय संगम   का दवाब   उसके परिणाम 

Careful ,trying for a baby can make men  impotent 

The pressure to perform may lead to dysfunction and even adultery , new scientific research reveals 
Perils of performance :After the rigours of six months of 'timed intercourse ' four out of ten men had become impotent 

  अकसर एक ख़ास समय सीमा एक ख़ास अवधि में संतान चाहने वालों के लिए माहिर एक समय सारणी बनादेतें हैं समय संगम की (Timed intercourse) की .बतलाया जाता है मासिक चक्र के आखिरी दिन से गणना करते हुए  फलां तिथियों को प्रेम मिलन मनाने से जीवन साथी के साथ मैथुन बद्ध होने से संतान प्राप्ति के अवसर बढ़ जातें हैं .

इससे एक स्वाभाविक घटना का जो आवेग एक प्रवाह होता है एक कायिक और मानसिक अन्विति होती है वह अकसर टूट जाती है .तद्जनित  तनाव से स्ट्रेस हारमोन कोर्टिसोल ज्यादा पैदा हो जाता है जो पुरुष हारमोन टेस्तास्तेरान के क्वांटम को इस पुरुष यौन हारमोन की मात्रा को कम कर देता है.यही वह हारमोन है जो यौनेच्छा को पंख लगाए रहता है .अश्वारोहन के लिए तैयार करता है सईस  को लेकिन बढा हुआ तनाव और नतीजे देने के  औत्सुक्य के चलते कई मर्तबा सईस का पैर पायेदान में ही फंसा रहा जाता है .घोड़ा बैठ जाता है .

नतीज़ा हो सकता है लिगोथ्थान अभाव (erectile dysfunction ),दाम्पत्य  प्रेम  से  विपथन.विवाहेतर यौन मिलन .यौन संगम .

दरअसल मैथुन मात्र एक भौतिक क्रिया नहीं है .संबंधों का उन्मुक्त दवाब रहित तारल्य भी है .शरीर और मन की एक रिदम एक अन्विति  लयताल भी है .एक तात्कालिकता भी है .अनुनाद भी .

समय संगम में यही लय ताल टूट जाती है .

अध्ययनों से पुष्ट हुआ है समय संगम से रिश्ते तनाव से छ :  माह की अवधि में ही दस में से चार पुरुषों को लिगोथ्थान अभाव से दो चार होना पड़ा .कुछ अपने साथी  से ही यौन सम्बन्ध बनाने में झिझकने लगे .इधर उधर टहल लिए घोड़े की चाल आजमाने खुद को आश्वस्त करने के लिए .


समय संगम का दवाब उसके परिणाम


Marital Love

 समय संगम   का दवाब   उसके परिणाम 

Careful ,trying for a baby can make men  impotent 

The pressure to perform may lead to dysfunction and even adultery , new scientific research reveals 
Perils of performance :After the rigours of six months of 'timed intercourse ' four out of ten men had become impotent 

  अकसर एक ख़ास समय सीमा एक ख़ास अवधि में संतान चाहने वालों के लिए माहिर एक समय सारणी बनादेतें हैं समय संगम की (Timed intercourse) की .बतलाया जाता है मासिक चक्र के आखिरी दिन से गणना करते हुए  फलां तिथियों को प्रेम मिलन मनाने से जीवन साथी के साथ मैथुन बद्ध होने से संतान प्राप्ति के अवसर बढ़ जातें हैं .

इससे एक स्वाभाविक घटना का जो आवेग एक प्रवाह होता है एक कायिक और मानसिक अन्विति होती है वह अकसर टूट जाती है .तद्जनित  तनाव से स्ट्रेस हारमोन कोर्टिसोल ज्यादा पैदा हो जाता है जो पुरुष हारमोन टेस्तास्तेरान के क्वांटम को इस पुरुष यौन हारमोन की मात्रा को कम कर देता है.यही वह हारमोन है जो यौनेच्छा को पंख लगाए रहता है .अश्वारोहन के लिए तैयार करता है सईस  को लेकिन बढा हुआ तनाव और नतीजे देने के  औत्सुक्य के चलते कई मर्तबा सईस का पैर पायेदान में ही फंसा रहा जाता है .घोड़ा बैठ जाता है .

नतीज़ा हो सकता है लिगोथ्थान अभाव (erectile dysfunction ),दाम्पत्य  प्रेम  से  विपथन.विवाहेतर यौन मिलन .यौन संगम .

दरअसल मैथुन मात्र एक भौतिक क्रिया नहीं है .संबंधों का उन्मुक्त दवाब रहित तारल्य भी है .शरीर और मन की एक रिदम एक अन्विति  लयताल भी है .एक तात्कालिकता भी है .अनुनाद भी .

समय संगम में यही लय ताल टूट जाती है .

अध्ययनों से पुष्ट हुआ है समय संगम से रिश्ते तनाव से छ :  माह की अवधि में ही दस में से चार पुरुषों को लिगोथ्थान अभाव से दो चार होना पड़ा .कुछ अपने साथी  से ही यौन सम्बन्ध बनाने में झिझकने लगे .इधर उधर टहल लिए घोड़े की चाल आजमाने खुद को आश्वस्त करने के लिए .


Marital Love


Marital Love




सोमवार, 28 मई 2012

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम का नतीजा है ये ब्रेन फोगीनेस

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम का नतीजा है ये ब्रेन फोगीनेस 

दो बरस पहले भोपाल वासी इकबाल ने अपना बेचुलर ऑफ़ इंजिनीयरिंग कोर्स बढिया दर्जा लेकर संपन्न किया था .बेंगलुरु की एक अग्रिम सोफ्ट वेयर कम्पनी में उसे काम भी मनमाफिक   मिल गया था .जैसे जीवन भर की एक साध पूरी हो गई थी .वह बहुत खुश था .फिर यकायक ऐसा क्या हुआ कि काम पर आने के मात्र आठ महीना बाद ही उसे काम छोड़ना पड़ा .

अचानक उसे महसूस होने लगा वह कोई  भी काम ठीक से नहीं  कर पा रहा है .कंप्यूटर का कोई कमांड भी फोलो नहीं कर पा रहा है .यहाँ तक कि उससे कम्पनी में कोई उसका पता पूछ ले तो उसे नाम बताने में भी देर लग जाती है .

घर में भी  उसका यही हाल रहने लगा .सुबह सवेरे तो संवाद जैसे चुक जाते थे .होंठों पर ताला लग जाता है संवादों को सिटकनी चढ़ जाती थी .लेदेकर एकाधिक  अक्षर एकाक्षरी संवाद ही वह बोल पाता था .अलबत्ता शाम होते होते स्थिति कुछ सुधरती थी .

किसी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है ?

घर के लोगों का तो और भी बुरा हाल था .घर के बाहर यार दोश्त भी इस स्थिति को सहज स्वीकार करने को तैयार नहीं थे .लेकिन सच यही था .उसे अब सोचने में तकलीफ होने लगी थी .कुछ याद नहीं आता था यहाँ तक की अपना नाम भी पूछने वाले को वह बता नहीं पाता था .

ज़ाहिर है इन हालातों में उसे नौकरी छोडनी पड़ी .क्योंकि वह बैठा -बैठा  अपनी वर्क डेस्क पर ही सो जाता था .दिमाग साथ नहीं देता था .एक मानसिक कुन्हासा सब कुछ को सोचने को धुंध में ले चुका था .

वह भोपाल लौट आया .प्राकृतिक चिकित्सकों से लेकर काया चिकित्सकों को उसने दिखाया लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया आखिर उसे हुआ क्या है ?

इत्तेफाक था उसके एक रिश्ते में नजदीकी सज्जन मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल में काम करते थे .

उनके परामर्श पर वह न्यूरोलोजिस्ट (स्नायुरोगों के माहिर ) गिरीश नायर साहब की शरण में आगया .

डॉ नायर ने बतलाया इकबाल Brain -fogginess की चपेट में आगया है .

यह दिमागी धुंध नतीजा है chronic fatigue syndrome  का .

यह ऐसी बेहद की थकान होती है जिसकी  चिकित्सा जगत के पास कोई व्याख्या फिलवक्त नहीं है .किसी मेडिकल कंडीशन से इसकी तुलना नहीं  हो सकती .

अलबता भौतिक और मानसिक श्रम से बढती ज़रूर जाती है .बद से बदतर होती चली जाती है कायिक और मानसिक सक्रीयता के संग .आराम से कम नहीं होती .

हेतुकी (Causes)

 (1)विषाणु  संक्रमण(Viral infections)

(2) रोग  प्रतिरक्षण  अभाव (immune deficiencies) 

(3)हारमोन   सम्बन्धी  असंतुलन(Hormonal imbalance)     

CFS/ME/PVF

    A Condition ,known variously as CHRONIC FATIGUE SYNDROME ,MYALGIC  ENCEPHALOMYELITIS or  ENCEPHALOPATHY or POSTVIRAL FATIGUE SYNDROME, characterized by extreme disabling that has lasted for at least six months , is made worse by physical and mental exertion ,does nor resolve with bed rest ,and can not be attributed to other disorders .

The fatigue is accompanied by at least some of the following :muscle pain or weakness (fibromyalgia),poor coordination ,joint pain ,recurrent sore throat ,slight fever ,painful lymph nodes in the neck and armpits ,depression ,cognitive impairment (especially   inability to concentrate ) ,and general malaise .

        The cause is unknown , but in some cases some viral conditions (especially glandular fever ) are thought to trigger the disease; however ,no viral aetiology has yet been identified.

  Treatment is restricted to relieving the symptoms and helping sufferers to plan their lives with a minimum of energy expenditure.


Graded  physiotherapy may be helpful in some cases .

Many psychiatrist consider CFS /ME/PVF to be a mood disorder and use behavioural and cognitive techniques as well as anti -depressants to treat it . 

रविवार, 27 मई 2012

ईस्वी सन ३३ ,३ अप्रेल को लटकाया गया था ईसा मसीह को सूली पर

ईस्वी सन ३३ ,३ अप्रेल को लटकाया गया था ईसा मसीह को सूली पर 

Quake study says Jesus was crucified on April 3,33 AD/TIMES TRENDS/THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 26,2012,P19

मृत  सागर(Dead sea ) से बावस्ता भूकंपीय सक्रियता से जुड़े  एक अध्ययन के अनुसार  उस घडी पल छिन तारीक का ठीक ठीक पता चल गया है जिस दिन ईसा मसीह को सूली पर लटकाया गया था .रिसर्चरों के अनुसार वह शुक्रवार का दिन था तारीक थी अप्रेल तीन ईस्वी सन ३३ .बाइबिल  के नए संस्करण न्यू टेस्टामेंट में भी इसी तिथि का उल्लेख है .


डिस्कवरी न्यूज़ चैनल के अनुसार विशाल और विश्वाश्नीय भू -गर्भीय आंकड़ों के अलावा इस आशय के लिखित दस्तावेज़ी साक्ष्य भी मौजूद हैं .

इस निष्कर्ष पर पहुँचने से पूर्व भू -वेत्ताओं ने भूकम्पों की  एक ४,००० साला कालानुक्रम में पड़ताल की है .यह पड़ताल मृत सागर के सबसे ऊपरी (19 feet )परतदार (पतली तहों वाले ,स्तरित ,laminated sediments)अवसादों की की गई है .

नवीनतर अध्ययन ने अपना पूरा ध्यान यरूशलम से कुल १३ मील की दूरी पर मृत सागर की भू -कम्पीय हलचलों पर केन्द्रित रखा है .इस पड़ताल में भू -विज्ञानों के जर्मन शोध केंद्र के साइंसदानों ने शिरकत की है .
इस एवज मृत सागर के नजदीकी तट बंध     Ein Gedi Spa  पर  साइंसदानों  ने  डेरा  डाले   रखा  है  . 

Supersonic geophysical  के नाम चीन भू -शाष्त्री जेफरसन विलियम्स भी इस अभियान में शरीक रहें हैं . 

भू -विज्ञान के छात्र जानतें हैं अवसादों  मे हर साल कुछ परतें पड़ जातीं हैं जिन्हें Varves कहा जाता है .कुल मिलाकर तीन केन्द्रीय भागों (Cores)पर नजर रखी गई है . 

इस  क्षेत्र  में  आये  भूकम्पों  में  से  कमसे  कम  दो  ने पृथ्वी के केन्द्रीय भाग क्रोड़(आंतरक ,अभ्यंतर या कोर )को असर ग्रस्त किया था .इनमे से एक शक्तिशाली भू -कंप (जलजला )ईसा के जन्म से भी २६ वर्ष पूर्व तथा दूसरा जन्म के  २६ -३६ वर्ष बाद आया था .

The latter period occured during "the years when Pontus Pilate was procuretaor of Judea and when the earthquake of the Gospel of Matthew is historically constrained ,"said Williams .

आप  जानतें  हैं  बाइबिल  की ऐसी चार पुस्तकें हैं जिनमे से एक में ईसा के जीवन और उनकी शिक्षाओं का बखान किया गया है .यही इसोपदेश है .गास्पल  है .इन्हीं में से एक किताब का नाम मेथ्यु(Gospel of Matthew) था .

प्राचीन रोम में एक कानूनी और आर्थिक शक्ति संपन्न एक प्राधिकारी (प्रशाशक ,प्रबंधक )होता था जिसे प्रोक्युरेटर कहा जाता था . 

गुड  फ्राइडे  (Good friday)

विलियम आश्वश्त है उस विधायक तिथि और दिन के बारे  में जब ईसामसीह को सूली पर लटकाया गया .कीलित किया गया क्रोस पर .अलबत्ता ईस्वी सन (उस विधायक बरस )  को लेकर सवाल रहे आयें हैं .

दस्तावेज़ी संकेत 

विज्ञान पत्रिका नेचर में Colin Humphreys और उनके साथी Graeme Waddington का एक शोध पत्र इस बाबत छपा था .विलियम्स उसका भी हवाला देतें हैं .इसमें भी इस और इसी  विधायक तिथि का ज़िक्र  है .   

खगोलीय गणनाओं से भी यही तिथि पुष्ट होती है तथा यहूदियों का केलेंडर भी इसकी गवाही देता है .सर्वाधिक शुद्ध साल ईस्वी सन ३३ ही आता है .अलबत्ता ३ अप्रेल की तारीक को लेकर तो वैसे ही मतैक्य रहा है .

शनिवार, 26 मई 2012

दिल के खतरे को बढ़ा सकतीं हैं केल्शियम की गोलियां

दुनिया भर में तजवीज़ किये गए मरीजों को लिखे गए दवाओं के नुश्खे खंगालिए तो जानिएगा लाखों लाख लोगों को अस्थियों को मज़बूत बनाए  रखने खासकर बढती हुई उम्र में होने वाले बोन मॉस लोस अश्थी पदार्थ क्षय से बचावी चिकित्सा के बतौर   केल्शियम सम्पूरण या फिर केल्शियम की गोलिया खाने को कहा जा रहा है .

अब ज्यूरिख विश्व -विद्यालय एवं जर्मन शोध केंद्र ,Heidelberg  के रिसर्चरों ने न सिर्फ इस बचावी  चिकित्सा की कारगरता पर निशाना साधा है ,यह भी जड़ दिया है कि इन गोलियों के दीर्घावधि सेवन से दिल के दौरों के खतरे का वजन कई गुना बढ़ जाता है .

बेशक माहिरों ने इनके अन्वेषण को यह कहके बरतरफ  कर  परे धकेलने की कोशिश की है कि एक अकेले दोषपूर्ण अध्ययन से कुछ नहीं होता कोई निष्कर्ष निश्च्यातामक  तौर पर नहीं निकाला जा सकता .उधर रिसर्चर अपनी बात पे कायम हैं .

रिसर्चरों  ने २३९८० लोगों  पर पूरे ११ साल तक निगाह रखी है .पता चला है इनमे से जो नियमित केल्शियम गोलियां लेते रहें हैं उनके लिए करीब करीब दो गुना बढ़ जाता है दिल के दौरे का जोखिम .

पता यह भी चला कि उन १५,९५९ व्यक्तियों में से सिर्फ८५१ को  इस दरमियान दिल का दौरा पड़ा जो किसी भी बिध केल्शियम का इस्तेमाल नहीं करते थे ,जबकि केल्शियम सम्पूरण इस्तेमाल करने वालों के लिए इस दरमियान यह जोखिम ८६% बढ़ गया था .

जर्नल 'हार्ट' में रिसर्चरों ने इस अध्ययन का पूरा ब्योरा दिया है .बताया है इन सम्पूरण के चलन से दिल के दौरे का ख़तरा खासा बढ़ गया होगा .

सावधानी बरती जानी चाहिए इन गोलियों के इस्तेमाल में .इनके सेवन से जो ख़तराहार्ट अटेक का  सालाना ७०० के पीछे केवल एक व्यक्ति को रहा है वह बढ़कर ३५० के पीछे एक हो गया है .

बेहतर हो लोग ऐसी चीज़ें खाएं जिनमे कुदरती तौर पर केल्शियम का प्राचुर्य है यथा चीज़ ,दूध ,दही ,छाछ ,केला ,हरे पत्ते दार सब्जियां वगैरहा .

यह अन्वेषण उस अनुशंशा का विरोध करते हैं जिसके अनुसार १५०० मिलीग्राम या इससे कम केल्शियम का सम्पूरण कोई हानि नहीं पहुंचाता है .ये सिफारिशें स्वास्थ्य विभाग UK की हैं .

अलबता ये विभाग भी इससे ज्यादा सम्पूरण लेने के प्रति चेतावनी देता हुआ बतलाता है इससे ज्यादा मात्रा में केल्शियम सम्पूरण का रोज़ -बा -रोज़ का सेवन पेट दर्द और अतिसार की वजह बन सकता है .

बेशक केल्शियम और विटामिन डी का सम्बन्ध अश्थियों की मजबूती हड्डियों के स्वास्थ्य से योरोपियन फ़ूड सेफ्टी ऑथोरिटी ने भी जोड़ा है .

महत्व पूर्ण है केल्शियम की खुराक और वह अवधि जिस तक इसका सेवन माहिरों की सिफारिश करती है .कृपया इस बाबत अपनी कुछ न चलायें . 

सन्दर्भ सामिग्री :CALCIUM PILLS MAY UP HEART ATTACK RISK 

Supplements To Strength  Bones Should Be Taken With  Caution ,Says Study/TIMES TRENDS /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 25,2012,P21

लेबल :दिल के खतरे को बढ़ा सकतीं हैं केल्शियम  की गोलियां 

नुश्खे सेहत के और शोध की खिड़की से और बहुत कुछ :

नुश्खे सेहत के और शोध की खिड़की से और बहुत कुछ :अश्थियों के विकास और पनपने में सहायक  सिद्ध होता है अनानास (पाइन -एपिल ) .क्योंकि इसमें प्राचुर्य रहता है खनिज लवण मैंगनीज़ का जो जख्म के भरने और चमड़ी को पोषण देने में भी कारगर रहता है .

(२)चीकू का नियमित सेवन उदरीय एंजाइमों (किण्वक  )के स्राव में मददगार रहता है .यह एक तरफ अपचयन (मेटाबोलिज्म )में और दूसरी तरफ वजन कम रखने में भी कारगर सिद्ध होता है .

(३) बीबी के साथ यौन दगा बाज़ी करना दिल के दौरे को न्योंता देना है .अपनी बीवी के साथ विश्वास घात करना दिल की सेहत को दीमक लगाना है .खतरे का जोखिम बढ़ाना है दिल के लिए .एक इतालवी अध्ययन ने इसी विषय पर पूर्व में संपन्न अध्ययनों का पुनर -आकलन करने के बाद ही ये निष्कर्ष निकालें हैं .

(४)विटामिन सी से भरा हुआ है कीवी फल (Kiwi fruit) जो रक्त वाहिकाओं के विकास एवं निर्माण में कारगर तथा चमड़ी की टूट फूट की भरपाई में विधायक सिद्ध होता है .

(५)किशमिश में मौजूद खाद्य रेशे पानी में भीगे रहने पर फूल जातें हैं .एक बढ़िया विरेचक ( Laxative ) का काम अंजाम देते हैं .

(६)विटामिन 'के ' से युक्त खीरा अश्थियों को मजबूती प्रदान करने वाला पाया गया है .
.


(७)एंटी -ओक्सिडेंट लाइकोपीन से युक्त है तरबूज (Watermelon) .LYCOPENE हानिकारक अणुओं (मुक्त मूलकों ,FREE RADICALS)  को निष्प्रभावी कर देता है .कोशिकाओं की टूट फूट कम होती है भरपाई होने लगती है टूट फूट और कोशिका क्षय की ,Cells decay की  . 

(*८)विटामिन ई से युक्त रहतें हैं आम .फलों का राजा कहा जाने वाला आम हारमोनों का विनियमन करता है .यौनेच्छा में इजाफा  

(९)पोटाशियम और कोपर (ताम्बा )जैसे खनिज लवण  का अल्पांश लिए है लीची .दिल की धौंकनी को काबू में रखतें हैं ये लवण तथा परि -हृदय  धमनी रोग से हिफाज़त .

(१०)रेड एपिल्स में मौजूद रहता है एक ख़ास एंटी -ओक्सिडेंट Quercetin जो  हमारी  रोग  रोधी  प्रणाली को सशक्त करता है .रोग प्रति -रक्षण क्षमता को बढाता है .

(११)मशरूम्स  यानी खुम्बियों में होता है एंटी -बायोटिक यह हर चंद जीवाणु जन्य तथा फफूंद से पैदा हो सकने वाले संक्रमणों से बचाए रहता है यानी एंटी -फंगल और एंटी -माइक्रोबियल एजेंट के रूप में काम करता है .  
शोध की खिड़की 

(१)मोटापे के लिए कुसूरवार है दिमाग हमारा .इसके आधारीय हिस्से हाइपो -थेलेमस में जो न्युरोंस (नर्व सेल्स ,तंतु कोशिकाएं )नव निर्मित होतीं हैं वही इस बात को तय करतीं हैं कि आपको कब कितना खाना है .कुल मिलाके आपकी तौल आपका वजन इनके ही हाथों में सुरक्षित है .

जर्नल न्यूरो -साइंस में प्रकाशित एक एनीमल रिसर्च से उक्त बात पता चली है .

(२)रेशम के रेशे सूक्ष्म जीवों (माइक्रोब्स )को देखते ही देखते चट कर जातें हैं .मार देतें हैं  .बस एक सस्ता सा dip -and -dry treatment एक सरल उपाय रेशों को एक ख़ास तरल में डुबकी लगवाके  सुखालो .

इस प्रकार उपचारित  होने  पर  रेशम  के  रेशे anthrax जैसे जीवाणु का भी देखते ही देखते खात्मा कर देतें हैं जो बघनखे पहने रहता है .armour -coated spores लिए  रहता  है  .  



शुक्रवार, 25 मई 2012

सिजेरियन सेक्शन की सौगात बचपन का मोटापा

सिजेरियन सेक्शन की सौगात बचपन का मोटापा 


सिजेरियन सेक्शन की सौगात बचपन का मोटापा 

रिसर्चरों की एक टीम ने अपने ताज़ा अध्ययन में यह दावा किया है ,प्रसव के लिए सी -सेक्शन (C-Section, cae -sarean section) का  विकल्प  चुनने  वाली  माताओं  की  संतानों  के ओबीस (मोटापा रोग से ग्रस्त होना )होने की संभावना दो गुना बढ़ जाती है .

बोस्टन चिल्ड्रन अस्पताल ,मासाचुसेट्स के शोध कर्मियों की एक टीम ने १९९९-२००२ की अवधि में १२५० नव -प्रसूताओं (जच्चा -बच्चा दोनों ) और उनके नवजातों की पड़ताल की है .पता चला इनमे से जिन माताओं ने सी -सेक्शन की बैसाखी थामी सामान्य प्रसव को छोडके तीन साला होते होते उनके नव -जायों (बच्चों )के लिए ओबेसिटी का ख़तरा दो गुना ज्यादा बढ़ गया है .

गणना माँ के पहले से चले आये मोटापे की भी की गई आकलन में इसे भी शरीक किया गया .मोटापे के लिय कुसूरवार अन्य घटकों को भी मद्दे नजर रखा गया तब भी नतीजा वही रहा ,तीन साल की उम्र आते आते ये नवजात अपने ओबीस हो जाने के जोखिम को दो गुना बढ़ा लेतें हैं . 



गुप्त यौन सम्बन्ध ,अपने जीवन साथी के साथ बे -वफाई दगा बाज़ी भी बनती है दिल के दौरे की वजह .ऐसा खासकर तब होता है जब आपकी यौन संगिनी आपकी पत्नी से कम उम्र होती है .एक तरफ उसे पूरी यौन तृप्ति दे पाने का तनाव दूसरी तरफ इस सम्बन्ध को छिपाए रहने का परदे के पीछे बनाए रखने का दवाब धमनियों के फेटि प्लाक्स से अवरुद्ध हो जाने की वजह बन जाता है ऐसे ही दवाब के क्षणों में यह फेटि प्लाक विस्फोट के साथ फट भी जाता है .नतीजा होता है :हार्ट अटेक .. जर्मनी में संपन्न अनेक  अध्ययनों  के अनुसार दाम्पत्य प्रेम मिलन में बिरले ही मैथुनी मृत्यु के मामले दर्ज़ हुएँ हैं  दिल का दौरा दाम्पत्य मैथुन के दौरान यदा कदा  ही पड़ा है लेकिन दाम्पत्य की सात्विक आंच और कुदरती सुरक्षा से दूर दगा बाज़ी करते हुए चोरी छिपे मैथुनी रंगरलियाँ मनाते हुए कितनी ही मर्तबा Coital death के मामले सामने आयें हैं .


जर्मनी में किये गए अनेक अध्ययनों का यही सार है .

दगा बाज़ी न सिर्फ दाम्पत्य के प्रेम की आंच को ले उडती है दिल को भी इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है .एक अभिनव शोध का भी अब  यही सन्देश है .इतालवी शोध कर्ताओं ने पूर्व में संपन्न अध्ययनों में बे -वफाई के कारणों और उसके बाद आये बहुत बुरे नतीजों का गहन अध्ययन किया है .

पता चला आकस्मिक मैथुनी मृत्यु (Sudden coital death ) के मामले दाम्पत्य दायरे से बाहर बनाए गए प्रेम मिलन में ही अकसर सामने आयें हैं . दगाबाजी अपनी कीमत खुद वसूलती है .दाम्पत्य प्रेम मिलन में यदा कदा ही दिल का हलका दौरा पड़ना देखने में आया है .

रिसर्चर इस आकस्मिक मृत्यु के लिए एक तबेवफाई भी बनती है दिल के दौरों की वजह .रफ अपराध भावना का व्यक्ति को अन्दर -अन्दर से खरोंचना सालना , आत्म ग्लानी से भर जाना  बताते हैं तो वहीँ इसके लिए   खुद की ही नजरों में खुद को ही दगा बाज़ बतलाना भी .

यह नतीजे फ्लोरेंस विश्व -विद्यालय के रिसर्चरों ने उन तमाम शोध पत्रों की बारीक जांच के बाद निकालें हैं जिनके विषय थे -बेवफाई (Unfaithfulness),दाम्पत्य इतर यौन सम्बन्ध ,दाम्पत्य के दायरे से बाहर मैथुन सम्बन्ध (Extramarital affairs ),दाम्पत्य  संबंधों  में दगा विश्वाश्घात (Infidelity ) और 'Men' .

एक  तरह  से बेवफा मर्दों के बारे में पूरी जानकारी जुटाई गई और इसके खतरनाक परिणामों की भी ,संभावित जोखिम के बढ़ते वजन की भी .   तो भाई साहब इधर उधर मुंह मारने से ख़तरा मात्र HIV -AIDS का ही नहीं है दिल के दौरों का भी है .  

इधर  उधर  मुंह  मारने  के  खतरे  :बेवफाई भी बनती है दिल के दौरों की वजह .

राम राम भाई !   राम राम भाई !  राम राम भाई !


गोपनीय जीव विज्ञान देगा सुराग येती के होने ,न ,होने का  


आइये पहले समझें क्या है गोपनीय जीव -विज्ञान (क्रिप्टो -जू -ओ -लाजी ,Cryptozoology).

ऐसे पशुओं का अन्वेषण जो मिथ बने  हैं यथार्थ में हैं भी या नहीं कोई नहीं जानता .अलबत्ता किस्से कहानी बहुत हैं लेकिन पुष्ट अभी तक कुछ नहीं हो सका है .

इसे  Loch Ness monster भी कहा जाता है .पौराणिक या फिर सुप्रसिद्ध नामचीन ज़रूर कहा जा सकता है इस अनोखे जीव या आदमी नुमा दैत्य  को .कोई इसके पदचिन्हों के देखे जाने के वृत्तांत प्रस्तुत करता है कोई बालों के गुच्छ मिलने का दावा करता है किससे कहानियां  बयान  करता है   इससे जुडी हुई .


लेकिन शायद अब दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है .


Genetic tech to help examine 'Yeti' DNA /SHORT CUTS /THE TIMES OF INDIA ,MUMBAI ,MAY 23 ,2012,P19

सहयोग  का एक नया मार्ग प्रशस्त किया है उस हालिया करार  ने जो ऑक्सफोर्ड विश्व -विद्यालय और Lausanne Museum of Zoology के बीच संपन्न हुआ है .ये दोनों मिलके उन कार्बनिक अवशेषों का आनुवंशिक तकनीकों से अध्यन विश्लेषण करेंगें  जो कुछ लोगों के दावे के अनुसार उनके पास सुरक्षित हैं .


लगभग ऐसा ही  दावा कुछ लोग विलुप्त नर वानरों और विकसित अन्य   प्राणी  वर्ग के  जीवों के बारे में करतें हैं .आधुनिक मानव भी Primates के इसी वर्ग से ताल्लुक रखता है .

इस प्रोजेक्ट का नाम है :The Oxford -Lausanne Collateral Hominid Project .

इस प्रायोजना के तहत उन सब महानुभावों ,संस्थाओं को खुला न्योता है जिनके कब्जे में कैसा भी गोपनीय जैविक सामान है जैव पदार्थ है .Cryptozoological material मौजूद है .

उनसे पेशकश की गई है वह विस्तार से इस बाबत बतलाएं और प्रार्थना करके मांगे जाने पर खुद आके इस प्रोजेक्ट के करता  धर्ताओं को मुहैया करवाएं .खासकर Hair shafts आदि ताकी इनका गहन आनुवंशिक अध्ययन विश्लेषण किया जा सके .

Hominid :It's a primate belonging to a family of which the modern human being is the only species still in existence .Family :Hominidae  


यहाँ जेंडर चेंज सर्जरी महज़ हज़ार रूपये में उपलब्ध है जबकि निजी अस्पताल इसी काम का २-५ लाख रुपया वसूल रहें हैं .गौर तलब है सर्जरी में इस्तेमाल होने वाला सामान उतना महंगा भी नहीं है निजी अस्पतालों में पैसा देना पड़ता है डॉ के कौशल का ,हुनर का माहिरी  का और स्पेशल रूम में दस पन्द्रह दिन के किराए का .यही कहना है डॉ मुकुंद जगन्नाथन साहब का .

आप शीयन अस्पताल मुंबई में प्लास्टिक एवं सौंदर्य शल्य चिकित्सा के मुखिया हैं .यह अकेला सरकारी (तथाकथित खैराती )अस्पताल है जिसका संचालन BMC के हाथ में है .यहाँ पर इस सर्जरी की सुविधा उपलब्ध करवाना डॉ जगन नाथन की बरसों की साधना और समर्पण का प्रति -फल है .आपने इस विषय पर सैंकड़ों विज्ञान प्रपत्र जर्नल्स खंगालें हैं .केस स्टडीज़ का गहन अध्ययन किया है और सबसे बढ़के बाहर विदेशों की ख़ाक छान के माहिरों की क्लिनिक में काम सीखा है .सिंह अवलोकन किया है इस काम का जेंडर चेज़ सर्जरी के विभिन्न पक्षों आयामों का .

एक तरफ इस सर्जरी से चस्पां सामाजिक अभिशाप और दूसरी तरफ बेहद की खर्ची इसे आम आदमी की पहुँच से बाहर बनाए रही है .आपने इसी मिथक को इसी सामाजिक वर्जना को तोड़ा है बकौल आपके जेंडर करेक्शन सर्जरी कोई  लक्ज़री नहीं है न ही यह कोई माइकल जेकशन  बनने की ललक है .

जेंडर डिसऑर्डर (लैंगिक शिनाख्त विकार ) एक चिकित्सकीय उलझाव पेचीला पन एक  मेडिकल कोम्प्लिकेशन है भाई साहब .यह आदमी के मनो -भौतिक शरीर को अन्दर अन्दर मार डालता है तबाह कर देता है उसके अंतर जगत को ,मानस को .उसका और उसके परिवारियों के लिए जीवन जीना दुष्कर हो जाता है

"किस प्रकार के सदमे से ये गुजारतें हैं उसे मैंने नज़दीक से देखा है .उत्तर शल्य आने वाले बदलावों को भी मैंने दृष्टा भाव से निहारा है "यही कहतें हैं डॉ .जगन नाथन .जो चाहतें हैं इन्हें सामाजिक मान्यता एवं ,तदानुभूति मिले .

क्या होता है यहाँ शल्य से पहले 

      मनोरोग विभाग के मुखिया डॉ .नीलेश शाह तीन चरणों में डॉ .जगन नाथन के मरीजों का जायजा लेतें हैं .पहले चरण में मरीज़ के व्यवहार पर नजर रखी जाती है .पुख्ता किया जाता है इस बात को कि यह लैंगिक पहचान का सच्चा और विश्वसनीय  ईमानदार मामला है भी या नहीं .

बचपन से पड़ताल शुरू की जाती है अमुक बचपन में किन खिलौनों से खेलताथा  /खेलती थी  .कौनसे वस्त्र उसकी पहली पसंद बनते थे .मित्र /मित्राएं कौन थे ?

दूसरा स्तर वय:संधि के शुरूआती दौर से ताल्लुक रखता है इस विमर्श का ,

तीसरे सत्र में माँ बाप को भी शरीक किया जाता है .

शाह जब मामले को हरी झंडी दिखा देतें हैं तब यह अस्पताल की नीति शाश्त्र सम्बन्धी एथिक्स कमेटी के सुपुर्द कर दिया जाता है .

इस कमेटी का फैसला अंतिम होता है जो सभी पक्षों के लिए मान्य होता है बाध्यकारी  भी .

गत डेढ़ सालों में शीयन अस्पताल छ :मामले लैंगिक पहचान विकार शल्य के निपटा चुका है .

इनमे से दो का विवाह हो चुका है .सुख चैन से हैं वह अपने वैवाहिक जीवन में .

दो मामलों में  उत्तर शल्य परेशानियां सामने आईं हैं .उनका समाधान किया जा रहा है .

डॉ .जगन नाथन सहर्ष बिधान बरुआ की सर्जरी को राजी हैं .अलबत्ता वह उसके चिकित्सक से विमर्श भी करना चाहेंगें .उनके लिए बस  वह एक नया मरीज़ होगा .कोई आग्रह विग्रह नहीं .कोई संकोच नहीं .कोई भय नहीं सामाजिक या पारिवारिक किसी भी और से प्रक्षेपित .

शीयन अस्पताहला शल्य इस आशय की पहली  (जेंडर रेक्तिफिकेशन सर्जरी )अगस्त २०१० में संपन्न की  थी . 

सन्दर्भ सामिग्री :-Bidhan Barua's got a cheaper option at Sion hospital 

The gender change surgery which costs anything between Rs 2 and 5 lakh at a private hospital is available at Sion hospital for Rs 1,000

Mumabi Mirror ,May 22,2012 P8