बुधवार, 9 सितंबर 2009

एक डेमोक्रेसी जहाँ सुनने वाले का भी अधिकार है ......

लेबर दे के बाद कल मंगल -वार को नए सत्र के लिए अमरीकी स्कूल खुले ,ओबामा ने पेश कश की बच्चों को एड्रेस करने की ,उनके भाषण की प्रति स्कूल प्रशाशन ने मंगवा ली .कारण फ्लोरिडा रिपब्लिकन चेअरमेन ने इसे सोसलिस्ट एजेंडा ,लिबरल लाईज़ कहा .माँ बाप ने एतराज़ जताया -उनके बच्चों को बाध्य ना किया जाए ,भाषण सुनने के लिए .सुनने वाले उन क्षात्रों के लिए अलग से व्यवस्था की गई ,,जिनके अभिवावकों को कोई एतराज़ नहीं था .तो जनाब एक डिमोक्रेसी यह भी है ,जहाँ सुनने वाले का भी अधिकार है ।यद्दय्पी जिम ग्रीअर ने भाषण पढ़ने के बाद अपना एतराज़ वापस ले लिया ,उन्हें टेक्स्ट में कुछ भी राजनितिक औ अटपटा नहीं लगा .हमारे यहाँ एक किताब पर बिना पढे हंगामा है ,एक लेखिका की बिला वजह फजीहत हो चुकी है ,६ -६ महीना उनका वीजा बढाया जा रहा है .इसे सेकुलर डिमोक्रेसी कहा जाता है .तसलीमा नसरीन मुस्लिम लेखिका हैं ,हिदूं लोगन की हिमायत करती हैं ,सच को सच कहने का होसला रखतीं हैं .यहाँ सच केवल युवराज बोल सकतें हैं .
एक डिमोक्रेसी हमारी है ,जहाँ उन बच्चों को भी घेर कर लाया जाता है ,जो ख़ुद तैयार भी नहीं हो सकते ,झंडी नन्ने हाथों में थमा कर रास्ते में खडा कर दिया जाता है ,ताली भी बजानी पडती है ,आंखों का इशारा पाकर ।
यहाँ तो प्रतिनिधि भी चुनने का अधिकार नहीं हैं -भगवान ने पाँच उंगलियाँ वोटिंग मशीन का बटन दबाने के लिए ही तो दी हैं ,चाहे फ़िर मुकाबला दो खूनी लुटेरों में हो ,चारा खोरों में हो ।
ओबामा का भाषण १५,००० अमरीकी स्कूलों में सुना भी गया ,गुना भी गया ."दी फ्यूचर इज वाट यु मेक ईट . .फेलियोर्स दज नाट मीन वीकनेस .नजर लक्ष्य से नहीं ह्थानी है ,नाकामयाब हो गए तो क्या ,रुकना नहीं है -गिरतें हैं सह्स्वार ही मैदाने जंग में वो तिफ्ल क्या जो रेंग कर घुटनों के बल चले -यही मूल स्वर था ओबामा के संबोधन का अमरीकी नौनिहालों के लिए -अपनी स्कूल -इंग की व्यवस्था ख़ुद करनी है ,देयर इज नो एक्सक्यूज़ फार नाट ट्राइंग .५ (पाँच करोड़ )बच्चों में से कुछ को छोड़ बाकी ने यह उद्बोधन जी जान से सुना भी गुना भी .

1 टिप्पणी:

Alpana Verma ने कहा…

President Obama is really creating history...
I appreciate him though many steps are not in favour of indians.

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