शुक्रवार, 28 दिसंबर 2012

New Delhi Gang Rape Victim Extremely Critical: Singapore Doctor’s Release Health Bulletin


New Delhi Gang Rape Victim Extremely Critical: Singapore Doctor’s Release Health Bulletin


http://www.aegindia.org/2012/12/delhi-gang-rape-victim-extremely-critical-singapore-doctors-release-health-bulletin/219505.html

हालाकि  निर्भया  ने दिल्ली से सिंगापुर का सफर मौत को धता बताते हुए कामयाबी पूर्वक तय कर लिया  है 

.आशंका के अनुरूप छ : घंटे के हवाई सफर में  उसका रक्त चाप एक दम से गिर गया था  जिसे मुस्तैद 

माहिरों की टीम ने  धमनी में  एक पतली ट्यूब


 डालके ,Arterial line से  रक्त चाप का एक दमसे  सटीक मानिटरन करते हुए उसकी डूबती हुई 

हालत 

को संभाल लिया  था  .

आरटीरीयल लाइन का इस्तेमाल गहन चिकत्सा निगरानी के लिए अतिचिंतनीय मामलों में रक्त चाप पर 

24x7 घंटों नजर रखने के लिए  किया जाता है। 

यह नानइनवेसिव तरीके से मानिटर किये रक्त चाप के  बरक्स ज्यादा भरोसे मंद समझा जाता है . 

 परम्परा गत तरीके से लिए गए रक्त चाप में 20%की घट बढ़ रह सकती है जो ऐसे मामलों में घातक सिद्ध 

हो सकती है .

मौत के खिलाफ  जाँबाज़ निर्भया  की जंग ज़ारी है हालाकि माउंट एलिजाबेथ अस्पताल सिंगापुर ने निर्भया 

को वहां  दिए जा 

रहे इलाज़ के बारे में अभी कुछ नहीं बताया  है .इतना जरूर बतलाया है उसकी हालत नाज़ुक बनी हुई है .उसे 

अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में रखा गया है . 

मंगलवार रात सरकार को खुफिया सूत्रों से पता चला था निर्भया के  जीवन का अंत दिल्ली में भारी उथल 

पुथल मचा सकता है .

मेदान्ता अस्पताल से उसे सिंगापुर के अस्पताल ले जाने के निर्णय पर मोहर लगवाई  गई जो क्रिटिकल 

केयर और अंग प्रत्यारोप के लिए जाना जाता है जहां राज्य सभा सांसद अमर सिंह जी भी दीर्घावधि से  

स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर रहें हैं .पूर्व में तमिल अभिनेता रजनीकांत को भी इलाज़ के लिए यहीं लाया गया 

था यह भारत के नज़दीक  एक भरोसे का उत्तर शल्य निगरानी  चिकित्सा केंद्र है .

जाँ बाज़ी में ही नहीं निर्भया

हिन्दुस्तानी आवाम की वह पहली महिला बन गईं हैं जो भारत के आम आदमी 

,गैर -राजनीतिक शिक्षित वर्ग का प्रतीक बन गईं हैं जिसे राज्य के खर्चे पर समुचित इलाज़ दिलवाने की 

पहल की गई है .

पूर्व में जन क्रान्ति के प्रतीक जय प्रकाश नारायण को ही यह गौरव प्राप्त था जिन्हें पटना से मुंबई सरकारी 

खरचे पर इलाज़ के लिए लाया गया था .उस समय आप एक ऐसे व्यक्ति थे जिसके पास भले कोई पोस्ट 

नहीं थी लेकिन आप उस दौर के अन्ना थे ,राष्ट्रीय राजनीति के उज्जवल प्रतीक थे .

आज निर्भया  आधी आबादी की पूरी अस्मिता की और  सम्पूर्ण इंसानियत  की लड़ाई लड़ रहीं हैं .प्रबल

जिजीविषा उन्हें हमारे बीच

बनाए हुए 

है .उनके इसी हौसले ने माहिरों को भी आशान्वित किया है .

Hope against hope though name is Nirbhya.

सच कहा है किसी ने परवाज़ पंखों से नहीं हौसलों से भरी जाती है .निर्भया  जल्द से जल्द अपने काम पे 

लौटना चाहतीं हैं . फिजियो की बकाया इन्टरनशिप पूरा करना चाहतीं हैं .


एक ही निर्भया भारी है ,

इस सेकुलर सरकार पर ,

 गर सभी निर्भया बाहर आ गईं ,

तब न  जाने क्या होगा ?



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